KSHAR-SUTRA CHIKITSA (क्षार सूत्र चिकित्सा)
यह क्षार कई औषधियों से बनता है, इसलिए यह तीन प्रमुख दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित या शांत करता है। इसका रंग श्वेत होता है, जो इसे सौम्य बनाता है, लेकिन इसमें जलाना, पचाना और उत्कों (Tissue) फाड़ने की क्षमता होती है। यह आग्नेय औषधियों से बनता है, इसलिए इसका रस कटु (तीखा), वीर्य उष्ण (गर्म) और गुण तीक्ष्ण (तेज) होते हैं। यह घावों को ठीक करने, ट्यूमर को खत्म करने, दूषित घावों को साफ करने, शुद्ध घाव को भरने, घाव को सुखाने, और रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है।
यह सख्त और उभरे हुए मांस को ठीक करने, कृमि, आमदोष, कफ, कुष्ठ, विष और अधिक चर्बी को नष्ट करने में भी सहायक है।
क्षार को तीनों दोषों को नष्ट करने, छेदन (कटाई), भेदन (छेदना), और लेखन (खुरचने) कार्यों के कारण और विशेष रूप से इसके उपयोग के कारण आचार्य सुश्रुत ने शल्यक्रिया (सर्जरी) में उपयोग होने वाले शस्त्रों में क्षार को श्रेष्ठ माना है।
क्षार के प्रकार:
क्षार का इस्तेमाल मुख्य रूप से दो रूपों में किया जाता है बाह्य और अभ्यांतर ।
बाह्य रोग जैसे कुष्ठ, सोरायसिस, अर्श, भगंदर, टीनिया, ट्यूमर, लियकोडर्मा, रिंगवॉर्म, बर्थ मार्क, क्लोजमा, मशक, अबसेस, कृमि, विष आदि।
अभ्यांतर रोग जैसे विष, इंटर्नल ट्यूमर्स, पेट के रोग, पथरी, कृमि और अर्श ।
बाह्य क्षार प्रयोग: क्षार सूत्र और पेस्ट/पाउडर के रूप में किया जाता है।
- क्षार सूत्र (Kshar Sutra): यह एक औषधीय धागा होता है जिसे विशिष्ट जड़ी-बूटियों और क्षारीय पदार्थों से उपचारित किया जाता है। यह मुख्य रूप से भगंदर (Fistula in Ano), बवासीर (Hemorrhoids),फिशर पाइलोनिडल साइनस और त्वचा पर होने वाली अनावश्यक वृद्धि को हटाने के लिए उपयोग किया जाता है।
- पेस्ट/पाउडर (Kshar Paste/Powder): यह एक ठोस रूप में होता है और इसे सीधे प्रभावित क्षेत्र पर लगाया जाता है। यह विभिन्न प्रकार के त्वचा रोगों, घावों, और सूजन को उपचारित करने में सहायक होता है।
अभ्यांतर क्षार प्रयोग: क्षार का अभ्यांतर प्रयोग दही, घृत, उष्ण जल या कुलत्थी के क्वाथ के साथ किया जाता है। यह सभी प्रकार के ट्यूमर और वात विकारों को नष्ट करता है।
क्षार (Kshar) आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण उपचारात्मक तत्व है जो क्षारीय या अल्कलाइन गुणों से युक्त होता है। इसे औषधीय पौधों की राख या खनिज यौगिकों से तैयार किया जाता है और इसके विभिन्न औषधीय लाभ होते हैं। आयुर्वेद में क्षार का उपयोग पारंपरिक उपचारों में विशेष रूप से उन स्थितियों के लिए किया जाता है जहां असामान्य ऊतक, वृद्धि, या शारीरिक असंतुलन हो। यह एक प्रकार का Chemical Cauterization जैसा उपचार होता है, जिसकी तुलना हम मॉडर्न Thermal Cauterization से कर सकते हैं।जिसमें कर्म (अर्थात क्रिया या प्रक्रिया) के माध्यम से रोगग्रस्त ऊतकों का उपचार किया जाता है।
क्षार का मुख्य रूप से उपयोग:
क्षार का उपयोग आयुर्वेद में कुछ रोगों में विशेष रूप से किया जाता है जैसे:
- भगंदर (Fistula in Ano): क्षार सूत्र का प्रयोग फिस्टुला के इलाज में किया जाता है, जो एक दर्दनाक स्थिति हो सकती है। इसे फिस्टुला के मार्ग में डाला जाता है ताकि सूजन और संक्रमण को कम किया जा सके और इलाज में मदद मिले।
- बवासीर (Piles): बवासीर के उपचार में क्षार का उपयोग सूजन को कम करने, रक्तसंचार में सुधार लाने, और अत्यधिक ऊतकों को हटाने के लिए किया जाता है।
- पाइलोनिडल साइनस (Pilonidal Sinus). क्षार सूत्र आयुर्वेदिक उपचार का एक प्रभावी तरीका है जो पाइलोनिडल साइनस जैसे रोगों के उपचार में उपयोग किया जाता है। क्षार सूत्र का प्रयोग संक्रमण को खत्म करने, सूजन को कम करने, और उत्कृण (Infected) ऊतकों को नष्ट करने में मदद करता है।
- फिशर (Chronic Fissure in Ano) – मांस का उभर आना (सेंटिनल पाइल) – दरार के पास एक छोटी सी गांठ बन जाती है।
- त्वचा की वृद्धि (Warts, Moles, etc.): क्षार का उपयोग मस्से, तिल, या अन्य असामान्य त्वचा वृद्धि को हटाने के लिए किया जाता है।
- पुराने घावों का इलाज: क्षार का उपयोग पुराने घावों और त्वचा पर होने वाली सूजन और संक्रमण को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।
क्षार कार्य कैसे करता है?
क्षार पदार्थ का क्षारीय गुण उसे उस स्थान पर खून के संचलन को बढ़ाने, रोगग्रस्त ऊतक को हटाने, और नए स्वस्थ ऊतक को उत्पन्न करने में सहायक बनाता है। यह एक प्रकार से शरीर के अंदर मौजूद दूषित पदार्थों और विकृतियों को बाहर निकालने का काम करता है।
क्षार के फायदे:
- प्राकृतिक उपचार: क्षार एक प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचार है जो शरीर को बिना आक्रामक शल्य क्रियाओं के उपचार प्रदान करता है।
- दीर्घकालिक राहत: क्षार उपचार शरीर में असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है, जिससे रोग की पुनरावृत्ति कम होती है।
- स्वस्थ ऊतकों का पुनर्निर्माण: क्षार का उपयोग स्वस्थ ऊतकों के पुनर्निर्माण को उत्तेजित करता है और नए ऊतकों की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
- कम आक्रामक और किफायती: पारंपरिक सर्जरी की तुलना में क्षार एक कम आक्रामक और अधिक किफायती विकल्प होता है।
- कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती: “रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, या केवल कम समय के लिए होती है।“
निष्कर्ष:
क्षार एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक उपचार है जो पुराने और जटिल रोगों के उपचार में मदद करता है। यह न केवल चिकित्सा क्षेत्र में, बल्कि सामान्य जीवन में भी स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी और सुरक्षित उपाय है। यदि सही तरीके से प्रयोग किया जाए, तो यह उपचार शरीर को संतुलित करने और स्वास्थ्य समस्याओं का हल करने में मदद करता है।
क्षार सूत्र (Kshar Sutra):
क्षार सूत्र, जिसे “क्षारीय धागा” भी कहा जाता है, एक आयुर्वेदिक उपचार विधि है जिसमें एक विशेष धागे को औषधीय पदार्थों से उपचारित किया जाता है। यह विशेष रूप से भगंदर (Fistula in Ano),बवासीर (Piles),पाइलोनिडल साइनस , फिशर (Chronic Fissure in Ano) और घावों (Wounds) जैसी स्थितियों में उपयोग किया जाता है। क्षार सूत्र एक प्रकार से Cauterization का कार्य करता है, जिससे संक्रमण कम होता है और ऊतकों में सुधार होता है।
क्षार सूत्र का निर्माण: क्षार सूत्र बनाने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जाती हैं:
- सूत्र का चयन: यह एक पतला सूती का धागा 20 नंबर गॉज होता है जिसे औषधियों से संसाधित किया जाता है।
- क्षार सूत्र मानक माप:
लंबाई – 29-31 सेमी,
वजन – 0.9-1 ग्राम,
मोटाई – 1.75-2 मिमी,
तन्य शक्ति – < 5 किग्रा,
पीएच – 8-9.2,
धागा – 20 नंबर गॉज. - परतों की कुल संख्या :11 परतें स्नुही क्षीर की, फिर 7 परतें स्नुही क्षीर और क्षार की, और अंत में 3 परतें स्नुही क्षीर और हरिद्रा की, कुल मिलाकर की 21 परतें बनाई जाती हैं।
- औषधीय उपचार: इस धागे को विशिष्ट क्षारीय और औषधीय पेस्ट से उपचारित किया जाता है। इसके लिए जड़ी-बूटियों और औषधीय खनिजों का मिश्रण किया जाता है।
- प्रयोग: इस उपचारित धागे को रोगग्रस्त स्थान या ऊतक पर डाला जाता है, जैसे भगंदर (Fistula in Ano),बवासीर (Piles) और पाइलोनिडल साइनस में। यह धागा धीरे-धीरे उस स्थान पर कार्य करता है, असामान्य ऊतक को खत्म करता है और नए स्वस्थ ऊतकों की उत्पत्ति को बढ़ावा देता है।

क्षार सूत्र के लाभ:
- सूजन और संक्रमण में कमी (less Infection): क्षार सूत्र का उपयोग सूजन, घाव, और संक्रमण को कम करने के लिए किया जाता है।
- न्यूट्रलाइजेशन और इलाज: यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और संक्रमित क्षेत्र को ठीक करने का कार्य करता है।
- दीर्घकालिक राहत (lesser Recurrence): इस सूत्र का उपयोग समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह स्वाभाविक रूप से ऊतकों को पुनर्निर्माण और उपचार में मदद करता है। इसका पुनरावृत्ति दर (Recurrence rate ) 3.33% है, जो आधुनिक ओपन सर्जरीज़ की तुलना में कम है ।
- कम आक्रामक (Non Invasive): पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले क्षार सूत्र एक कम आक्रामक और सरल प्रक्रिया है, जो जल्दी ठीक होती है और संक्रमण का खतरा कम होता है।
- कम घाव के निशान (Less Scar formation): क्षार सूत्र के उपयोग से कम घाव के निशान बनना ।
- अचूक साधन : आयुर्वेद अनुसार यह बवासीर (Piles) और भगंदर (Fistula in Ano) जैसे रोगों के ईलाज का एक अचूक साधन है।
- अस्पताल में रुकने की आवश्यकता नहीं : क्षारसूत्र के ईलाज में अधिकांश मरीजों को अस्पताल में रुकने की आवश्यकता नहीं होती है, और अगले ही दिन रोगी अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस जुड़ सकता है।

क्षार सूत्र चिकित्सा (Kshar-sutra Chikitsa):
क्षार सूत्र चिकित्सा आयुर्वेद की एक प्रमुख शाखा है जिसमें विभिन्न प्रकार के सूत्रों का उपयोग शल्य चिकित्सा में किया जाता है। इसमें न केवल क्षार सूत्र बल्कि अन्य औषधीय सूत्रों का भी प्रयोग होता है। सूत्र चिकित्सा का उद्देश्य रोगग्रस्त स्थानों का इलाज करना और शरीर के विभिन्न अंगों में संतुलन लाना है।
क्षार सूत्र की प्रक्रिया (Procedure) –
1. रोग का निदान (Diagnosis) और तैयारी
- सबसे पहले, रोगी का अच्छे से निदान किया जाता है। इसके लिए डिजिटल परीक्षा (Digital Examination) और प्रोक्टोस्कोपी (Proctoscopy) की जाती है ताकि गुदा क्षेत्र को अच्छे से आकलित और देखा जा सके। यह जांच रोगी के गुदा मार्ग और अंदरूनी हिस्से की स्थिति को सही से समझने में मदद करती है।
- इसके बाद, यह देखा जाता है कि समस्या भगंदर /Fistula in Ano (एक प्रकार का गहरी नली बनना), बवासीर (Piles) या कोई अन्य शल्य रोग है।
- फिर, चिकित्सक प्रभावित हिस्से को साफ करते हैं और रोगी को आराम से बिठाकर उपचार के लिए तैयार करते हैं।
2. स्थानीय एनेस्थीसिया (Local Anesthesia) का उपयोग
- इस प्रक्रिया में दर्द न हो, इसके लिए प्रभावित क्षेत्र में एनेस्थीसिया लगाया जाता है, ताकि रोगी को कोई तकलीफ न हो।
3. क्षार सूत्र का लगाना (Thread Application)
- इस चरण में, चिकित्सक एक धातु की सुई (Metal Probe) का उपयोग करते हैं ताकि भगंदर (Fistula in Ano) के मार्ग (Track) की दिशा का पता लगाया जा सके।
- जब आंतरिक खुला स्थान (Internal Opening) मिल जाता है, तब क्षार सूत्र को सुई के साथ बांधकर फिस्टुला के मार्ग में डाला जाता है। फिर इसे गुदा मार्ग से बाहर खींच लिया जाता है। क्षार सूत्र धीरे-धीरे इस मार्ग में चढ़ते हुए सूजन और संक्रमण को समाप्त करता है, और फिस्टुला को ठीक करता है।
4. नियमित बदलाव (Thread Change)
- क्षार सूत्र को 7-10 दिनों तक प्रभावित क्षेत्र में रखा जाता है। हर हफ्ते रोगी की जांच की जाती है, और जरूरत के हिसाब से नया क्षार सूत्र डाला जाता है।
- यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक घाव या फिस्टुला पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता।
5. क्षार सूत्र के प्रभाव (Effect of Kshar Sutra)
- क्षार सूत्र का असर धीरे-धीरे शुरू होता है। यह आंतरिक और बाहरी संक्रमण को खत्म करता है, सूजन को कम करता है, और घाव को भरने में मदद करता है।
- क्षार सूत्र धीरे-धीरे प्रभावित हिस्से को साफ और स्वस्थ करता है, जिससे संक्रमण खत्म होने लगता है और सूजन कम होती है।
6. सर्जरी के बाद का समय और देखभाल (Post Operative Treatment & Care)
- क्षार सूत्र की प्रक्रिया के बाद रोगी को नियमित सफाई, आराम और सही आहार की सलाह दी जाती है।
- आंत्र नियमितता बनाए रखने के लिए संतुलित आहार का पालन करें, फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें, पर्याप्त पानी पिएं, और खट्टे, गहरे तले हुए, तैलीय व मसालेदार खाद्य पदार्थों से बचें।लंबे समय तक बैठे या खड़े रहने से बचें।
- क्षारसूत्र चिकित्सा दर्दनाक नहीं होती है, इसे स्थानीय संज्ञाहरण (Local Aaesthesia) के साथ आसानी से किया जा सकता है। पोस्टऑपरेटिव रूप से यदि कुछ मामलों में दर्द होता है, तो उसे Analgesic (दर्द निवारक दवाओं) द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
- पोस्टऑपरेटिव स्थिति में Ice Pack और त्रिफला कषाय के साथ Sitz Bath की सलाह दी जाती है। यह उपाय सूजन को कम करने, दर्द से राहत देने और घाव को जल्दी ठीक करने में सहायक होते हैं।
- चिकित्सक द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना बहुत जरूरी है ताकि इलाज का असर सही तरीके से हो सके और घाव जल्दी ठीक हो।
क्षारसूत्र के लाभ सर्जरी की तुलना में:
- यह एक न्यूनतम आक्रमणकारी प्रक्रिया है, जिसमें कोई चीरे या टांके नहीं होते।
- इसे स्थानीय संज्ञाहरण के तहत किया जा सकता है, जिससे सामान्य संज्ञाहरण और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता कम हो जाती है।
- यह औषधीय धागे के क्षारीय pH के कारण घाव के भरने को बढ़ावा देता है और संक्रमण को रोकता है ।
- क्षारसूत्र प्रक्रिया में Anal Incontinence (गुदा संबंधित अवशोषण की समस्या) नहीं होती है, अर्थात् नियंत्रण बना रहता है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का गुदा की पेशी (Anal Sphincter) को स्थायी नुकसान नहीं होता, और रोगी का गुदा क्षेत्र पूरी तरह से नियंत्रित रहता है, जिससे मरीज को सामान्य जीवनशैली में कोई दिक्कत नहीं होती।
- क्षारसूत्र प्रक्रिया में लंबी छुट्टी लेने की आवश्यकता नहीं होती, जो आधुनिक सर्जरी में आमतौर पर आवश्यक होती है। मरीज जल्दी ही अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौट सकता है।
- यह सर्जरी की तुलना में एक अधिक किफायती विकल्प है।
क्षार सूत्र के उपयोग में सावधानियाँ:
- स्वच्छता का ध्यान रखना: उपचारित स्थान पर संक्रमण से बचने के लिए पूरी स्वच्छता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
- प्रशिक्षित चिकित्सक से ही करवाना: क्षार सूत्र की प्रक्रिया एक प्रशिक्षित और अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा ही करवानी चाहिए।
- उपचार के बाद देखभाल: उपचार के बाद रोगी को उचित देखभाल, आहार और जीवनशैली में सुधार की आवश्यकता होती है ताकि उपचार पूरी तरह से प्रभावी हो सके।
निष्कर्ष:
क्षार सूत्र एक अद्भुत आयुर्वेदिक उपचार विधि है जो पारंपरिक सर्जरी से कम आक्रामक है और शरीर के स्वाभाविक उपचार को बढ़ावा देती है। यह विशेष रूप से भगंदर (Fistula in Ano) , बवासीर (Piles), पाइलोनिडल साइनस और घावों जैसे रोगों के इलाज में सहायक होता है।
- प्रभावी उपचार (Effective Treatment)
- क्षार सूत्र चिकित्सा एक सुरक्षित और शक्तिशाली आयुर्वेदिक उपचार पद्धति है, जो गुदा रोगों का स्थायी समाधान प्रदान करती है।
2. आधुनिक चिकित्सा के समकक्ष (On par with Modern Medicine)
- यह विधि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समकक्ष है, लेकिन इसके प्राकृतिक और कम आक्रामक दृष्टिकोण से रोगी के लिए ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी है।
3. धैर्य और सटीकता (Patience and Precision)
- इस उपचार में धैर्य और सटीकता की आवश्यकता होती है, क्योंकि क्षार सूत्र का असर धीरे-धीरे और नैतिक रूप से होता है, लेकिन परिणाम दृढ़ और स्थायी होते हैं।
4. प्राकृतिक उपचार (Natural Healing)
- आयुर्वेद की यह अद्भुत विधि शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया को सहयोग और प्रोत्साहन देती है, जिससे शरीर को स्वस्थ रूप से ठीक होने का मौका मिलता है।
5. संक्रमण नियंत्रण (Infection Control)
- क्षार सूत्र की रासायनिक ताकत संक्रमण को नियंत्रित करती है और गुदा क्षेत्र के सूजन को कम करती है, जिससे रोगी को जल्दी आराम मिलता है।
6. नवीनतम पद्धति (Innovative Approach)
- क्षार सूत्र चिकित्सा एक आधुनिक, अभिनव और पारंपरिक उपचार का मिश्रण है, जो रोगी को प्राकृतिक और शल्य चिकित्सा से कम आक्रामक तरीके से उपचार प्रदान करती है।
7. सुरक्षा और स्थायित्व (Safety and Durability)
- यह उपचार विधि रोगी की सुरक्षा का पूरी तरह से ध्यान रखती है और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करती है।
8. प्राकृतिक अवयव (Natural Ingredients)
- क्षार सूत्र में प्रयुक्त प्राकृतिक अवयव (जैसे बबूल की छाल, नीम, हरीतकी) का संयोजन शरीर को स्वस्थ बनाने में सहायक होता है।
9. विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा का सम्मिलन (Integration of Science and Traditional Medicine)
- यह विधि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आयुर्वेद का एक सशक्त सम्बंध है, जो रोगों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाता है।
10. द्रुत प्रभाव (Quick Effect)
- क्षार सूत्र का प्रभाव तेज और दृढ़ होता है, जो जल्दी ही रोगी को राहत और स्वास्थ्य की ओर ले जाता है।
यदि आपको क्षार या KSHAR-SUTRA CHIKITSA (क्षार सूत्र चिकित्सा ) के बारे में और जानकारी चाहिए या उपचार प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है, तो कृपया संपर्क करें!